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रामचरितमानस भावार्थ अंग्रेजी हिंदी में-Ramcharitmanas Dohas in English-D.15.3-4

Posted On: 11 Jan, 2016 Others,कविता,Religious में

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नव वर्ष 2016 की सुभकामनाओं के साथ आप सभी को जो जागरण जंक्शन पर सक्रीय
हैं. रवीन्द्र के कपूर
.
Ramcharitmanas Doha Explanations in English & Hindi Balkand 15.3-4
प्रगटेउ जहँ रघुपति ससि चारू। बिस्व सुखद खल कमल तुसारू।।
दसरथ राउ सहित सब रानी । सुकृत सुमंगल मूरति मानी।। 15.3
करउँ प्रनाम करम मन बानी । करहु कृपा सुत सेवक जानी।।
जिन्हहि बिरचि बड़ भयउ बिधाता। महिमा अवधि राम पितु माता।। 15.4
.
Poetic Explanations in English & Hindi in Free Verse of the great Epic Ramcharitmanas
.
Where
ShriRam appeared
Like an enchanting Moon
On the pious land of Ajodhya
Spreading its cool pleasing beams
Endowed with love and fraternity
For all the peace lovers
And gave in abundance his love and care
To all the dwellers of the land
And saved the people of the land
From the foul attacks
Of demons, deceits and evil some
By appearing and acting like
A hail and frost for them
Which destroys the entire crops
Standing on the ground. ०१
.
I bow with all my gratitude
Before Lord ShriRam
And also before his great father
King Dashrath
Whom I can visualize sitting
On the throne of Ajodhya
With all his gracious queens. 02
.
King Dashrath was
Such a caring and pious King
For all the subjects of Ajodhya
Of that era
Because of his noble acts and deeds
Through which King Dashrath
And his son ShriRam
Ruled Ajodhya
That they continue to inspires us even today
For ruling a kingdom and living a life
In which there was care
And the feelings of love and concern
For all his subjects
At the cost of sacrificing
His own comforts, likings and
Even his love and life. ०३
.
These extraordinary humanitarian feelings
Contains
Not only good Karma and good thinking
For all the human beings
But doing and thinking good
For the Earth and for our Environment too
And beyond that
And thinking good
For the entire Universe. ०४
.
Because of the vastness of his goodness
And virtuous acts for all
I once again humbly bow
Before King Dashrath
With a hope that
He would grant me his blessings
Treating me
A humble servant of
His blessed son ShriRam
After creating whom (ShriRam)
Even the creator of the universe
Brahma was praised
By all the Gods
And Goddesses. 05
.
English and Hindi Poetic Explanations by Ravindra K Kapoor
Explanation in Hindi भावार्थ हिंदी में
.
जिस भूमि पर
प्रभु श्रीराम एक मनमोहक
चन्द्रमा के रूप में अवतरित हुए
अपनी शीतल सुखद किरणों का
स्नेहयुक्त सद्भावना प्रकाश फैलाते हुए
साथ ही उन सभी को
अपने स्नेह से ओतप्रोत करते हुए
जो की शांती और सद्भावना के प्रेमी थे
और जिस भूमि के लोगों की
श्रीरामजी ने अपने प्रेम और करुणा से
स्वयं देखभाल की
साथ ही इस भूमि के लोगों की उन्होंने
विशाल राक्षसों और असुरों से कुछ ऐसे
रक्षा कर उन्हें समाप्त कर दिया
जैसे की ओलों की वर्षा
खड़ी हुई पूरी फसल को
नष्ट कर देती है। ०१
.
मैं पुरे विनय से
प्रभू श्रीराम के
चरणों में नमन करता हूँ
और उनके पिता राजा दशरथ के
चरणों में भी
जो की विराजमान थे
अपनी सभी शालीन रानियों के साथ
अजोध्या के
सिंघासन पर। ०२
.
श्रीराम के पिता राजा दशरथ
उस युग के एक महान प्रजापालक और
अजोध्या की प्रजा के लिए
एक अति प्रजाहितकारी राजा थे।
उनके भलाई के कार्यों
और सुशाशन के कारण
प्रभु श्रीराम
आज भी सभी के आराध्य और प्रेरक हैं
राज्य को आदर्श बना
संचालित करने के उनके प्रयासों से
अपने निजी आराम और
यहां तक की जीवन और प्रेम तक को
प्रजा के लिए
बलिदान कर देने की
संकल्प शक्ति के कारण। ०३
.
इन असाधारण मानवीय भावनाओं में
सम्मलित थे
न केवल अच्छे कर्म और अच्छे विचार
सारी मानवता और संपूर्ण धरा
और पर्यावरण के लिए
वरन पुरे ब्रहमांड के लिए। ०४
.
इन भलाई के कार्यों की विशालता
और पुण्य कार्यों को
देखते हुए और स्मरण कर
मैं पुनः राजा दशरथ के चरणों में
अपना शीश झुकाता हूँ।
इस आशा के साथ
कि वो अपने पुत्र श्रीराम का
सेवक जान कर
मुझ पर अपनी कृपा करेंगे
जिन श्रीरामजी की
रचना करने पर
सृस्टि के रचियता ब्रह्मा जी की भी
सभी देवी देवताओं ने
बहुत प्रंसंशा की. ०५
.
Hindi Explanation as per Ramcharitmanas of Gitapress Gorakhpur. Courtesy from Gitapress Gorakhpur. भावार्थ
जहाँ (कशौल्यारूपी पूर्व दिशा) से विश्व को सुख देने वाले और दुष्टरूपी कमलों के लिए पाले के सामान श्रीरामचन्ररूपी चन्द्रमा प्रगट हुए. सब रानियों सहित राजा दशरथ को पुण्य और सुन्दर कल्याण की मूर्ती मानकर मैं मन, वचन और कर्म से प्रणाम करता हूँ. अपने पुत्र का सेवक जानकार वो मुझपर कृपा करें जिनको रचकर ब्रह्माजी ने भी बड़ाई पाई तथा जो श्रीरामजी के माता पिता होने के कारण महिमा की सीमा हैं.
.
NOTE: This exclusive work ( Free Verse of Ramcharitmanas Dohas in English and Hindi) of Explanations is the sole creation by its writer Ravindra K Kapoor and it is not allowed to be Published in any Books, Newspaper and Magazines etc without the written permission of its writer. However, it can be shared in its original form on internet without changing the name of its writer Ravindra K Kapoor.

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