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एक कविता भारत के गुणगान की एक अमेरिकन कवित्री के द्वारा

Posted On 17 Apr, 2016 Junction Forum, Religious, कविता में

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एक कविता भारत के गुणगान की एक अमेरिकन कवित्री के द्वारा – हिंदी रूपांतरण पोएट्री सूप पर भी – Ravindra K Kapoor के द्वारा.

एक कविता भारत के गुणगान की एक अमेरिकन कवित्री के द्वारा जिसे मैंने आप सब के लिए मैंने हिंदी में रूपांतरित किया है और जिसे पढ़ कर आपको गर्व होगा अपने भारतीय होने पर।
इस कविता को हिंदी में अपने पोएट्री सूप की एक मित्र के लिए लिखना मुझे इसलिए अच्छा लगा कि इसमें इस देश और इसकी संस्कृति और यहां तक कि इस देश के देवताओं को एक प्रेरणा श्रोत के रूप में मान कर इसकी सुन्दर बातों को सराहा गया है।
इस कविता को पढ़ मैं ये सोच रहा था कि एक तरफ कन्हैया जैसे नवजवान हैं जो इस देश की संस्कृति और धर्म का मजाक उड़ा इस देश को खंडित करने वालों के सुर में सुर मिला रहे हैं और दूसरी और भारत से हज़ारों मील दूर एक दुसरे धर्म और संस्कृति की लेखिका इसका और इस देश के लोगों की आस्था और विश्वास की आराधना कर इस के ज्ञान की धरोहरों को अपने बच्चों तक में पहुंचाना चाह रही है। धन्य है ऐसी लेखिका और ऐसी सोच जो दुसरे धर्म और संस्कृति की सुन्दर बातों को अपनाने का साहस रखती हो। आइए हम तमाम देशवासी कोनी मारकम का आभार अपने शब्दों और लाइक के द्वारा दें।

Famous Last Line प्रसिद्ध अंतिम पंक्ति
भारत (मूल कविता) India (Original Poem)
.
(भारतीय) संगीत सुनकर मैं
आनंदित हो जाती हूँ
और नृत्य देखकर प्रफुल्लित
ये हंसी और खिलखिलाहट
मुझे खुशी प्रदान करते हैं
और काव्य रोमांस में मैं भावुक बन जाती हूँ। 01
.
भारत की भाषा मेरे ह्रदय में
प्यार बन प्रस्फुटित होती है
उन प्रिय परिवारों को देख
जो अपने घर बार से दूर रह कर भी
देवी- देवताओं के प्रति
अपार श्रद्धा रखते हैं। 02
.
मुझे इन ( भारतीय) लोगों और
इनके रीतिरिवाजों से प्यार है
क्योंकि वो हर दिन को
जश्न मना जीते हैं
जीवन को पूर्ण रूप से जी कर
ऐसे (खुश रहने वाले) लोगों के सम्मान में
मैं प्रार्थना करूँ
ये मेरी इच्छा है। 03
.
और ये भी मेरी अभिलाषा है
किमैं सीख सकूँ विनम्रता
दयावान और प्रेममय होना
उस विवेक और बुद्धि के साथ
जो हर उस बुजुर्ग में मिलता है
जिससे मैं मिलती हूँ। 04
.
मैं अपने बच्चों को
ऐसा उपहार देना चाहती हूँ
ताकि वो अपनी नन्ही सी स्वप्निल आँखें खोल
इस आनंद उत्सव को देख सकें
जो आसमान में सितारों तक
पहुँचने पर मिलता है। 05
.
जब वो (मेरे नन्हे मुन्ने)
ये ज्ञान प्राप्त कर लेंगे
कि ऋषियों मुनियों को
कैसे सूना और समझा जाता है
तब वो जान जाएंगे
वो पवित्र ज्ञान
जो कि ऋषियों और महात्माओं से
युगों युगों से
हस्तांतरित होता आया है । 06
.
युगों युगों से
हस्तांतरित होते आये हैं
ऐसे भारत के देवी और देवता
मुझे पवित्र उदग़मों से
आवाज़ दे बुलाते प्रतीत होते हैं । 07
.
मैं गंगा जल में
स्नान करना चाहती हूँ
और मैं भारत में रहना चाहती हूँ
जब मानसून का आगमन होता है
और तब भी
जब होली के रंग मुस्कराते चेहरों पर लग
और खिल खिल जाते हैं। 08
.
मेरी इच्छा है (भारत की)
सभी सुंदरता को
अवशोषित और आत्मसात करने की
सभी मैत्री पूर्ण लोगों के साथ
मिलने की और
उत्सव गीत गाने की। 09
.
मैं उत्सव के संगीत का
आनंद उठाना चाहती हूँ
और नृत्य करते
नर्तकों को देखना चाहती हूँ
और सच में
ये अनुभव करना चाहती हूँ
कि मैं इसी (सुंदरता) का एक हिस्सा हूँ. 10
.
मैं सभी देवी देवताओं को
नमन करूंगी
और उनका भी आदर
जिनको मैं नहीं जानती
और भगवान गणेश
की शक्तियों को जानना
मुझे अति प्रिय होगा। 11
.
मैं पुष्पों से सुसज्जित उद्यानों में
ध्यान लगाना चाहती हूँ
सामूहिक रूप से चिंतनशील हो
मनन करना चाहती हूँ
अपनी आत्मा को
कमल के पुष्प से जोड़ना चाहती हूँ। 12
.
मैं अपने साथ
अपना छोटा कैमरा ले जाऊंगी
और (इस देश के) सभी
स्थलों और ध्वनियों को
अपने कमरे में उतार
अपने ह्रदय को
यहां के मूल निवासियों के साथ
सानंद हो बाँटूँगी। 13
.
खिलखिला कर हँसते
बच्चों की हँसी का
मैं भी
उन्मुक्त हो हिस्सा बनूंगी
और साझा करूंगी
अपने विचारों को और
अपनी संस्कृति को
भारत में
मैं अपने समय को
एक खजाने के रूप में सजोऊँगी। 14

Hindi Version by
Ravindra K Kapoor

Original Poem by Connie Marcum Wong on Poetry Soup.
Ravindra K Kapoor
http://www.poetrysoup.com/…/hindi_version_of___famous_last_…

Web Title : Poem by American Poet hailing India



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Lily Tandon के द्वारा
April 22, 2016

ऐसे भाव और भारत के प्रति ऐसा प्रेम इस देश की सुंदरता में चार चाँद लगाता है. ऐसी अंग्रेजी कविता को हिंदी में रूपांतरित कर आपने भारत के लोगों को इस देश की सुंदरता को दुसरे की नज़रों से देखने का एक बहुत ही अद्भुत संजोग दिया है. बधाई इस प्रयास के लिए और भारत के इस गौरव गान को हम सब तक पहुंचाने के लिए और जागरण को भी धन्यवाद की उसने इस कविता को फीचर किया. … लिली टंडन


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